सहमा सहमा के शमाको देखते है |
हर ईक जलती उतरती मोम की बुंदे |
किस्सा ए जिंदगी बयान करती है |
खामोश करके ख्वाबोंकी तबीर भरी निंंदे |
प्रशांत पेडणेकर , ३० एप्रिल २०१६
हर ईक जलती उतरती मोम की बुंदे |
किस्सा ए जिंदगी बयान करती है |
खामोश करके ख्वाबोंकी तबीर भरी निंंदे |
प्रशांत पेडणेकर , ३० एप्रिल २०१६
No comments:
Post a Comment