Saturday, July 9, 2016

पल

सहमा सहमा के शमाको देखते है |
हर ईक जलती उतरती मोम की बुंदे |
किस्सा ए जिंदगी बयान करती है |
खामोश करके ख्वाबोंकी तबीर भरी निंंदे |

 प्रशांत पेडणेकर , ३० एप्रिल  २०१६

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